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व्यक्ति आचार से बनता है महान, आगम ग्रंथ देते हैं दिशा



चातुर्मास अंतर्गत आगम ग्रंथ का वाचन शुरू-ग्रंथ सिर पर उठाकर मंदिर तक लाए समाजजन
उज्जैन। भगवान महावीर की देषणा 45 आगम ग्रंथों में निहित है, चातुर्मास
दौरान जैन मंदिर व उपाश्रयों में साधु साध्वी प्राकृत भाषा के इन ग्रंथों
का सरल रूप में वाचन करते हैं। इसी परंपरा के अंतर्गत खाराकुआ स्थित श्री
हीरविजयसूरीश्वर बड़ा उपाश्रय में गच्छाधिपति आचार्य दौलतसागरजी की निश्रा
में आचार्य हर्षसागर सूरिजी मसा ने मंगलवार सुबह 9.15 बजे से आगम ग्रंथ
का वाचन शुरू किया। प्रथम आगम में प्रभु के द्वारा बताए गए आचार,
व्यवहार, सिध्दांत को समझाते हुए आचार्यश्री ने कहा कि आचार, व्यवहार ही
व्यक्ति को महान बनाते हैं। हम जैसा आचरण रखेंगे, हमारा व्यक्तित्व वैसा
ही निर्मित होगा। आगम की वाचना श्रवण करने सैकड़ों समाजजन उपस्थित रहे।
पेढ़ी ट्रस्ट अध्यक्ष विमल पगारिया व सचिव राजेश पटनी के अनुसार जैन धर्म
में 45 आगम ग्रंथ हैं। प्रतिदिन आचार्यश्री 1-1 आगम का सरल रूप में
भावार्थ समाजजनों के बीच रखेंगे। प्रथम दिन महावीर गादिया के कंठाल स्थित
निवास से आगम ग्रंथ को बैंडबाजों के साथ सिरोधार्य कर समाजजन मंदिर तक
पहुंचे। आगामी 45 दिनों तक यह क्रम जारी रहेगा। द्वितीय आगम ग्रंथ
उच्चारित कराने का लाभ राजेशकुमार निलेशकुमार पावेचा परिवार ने लिया।
बुधवार को उनके निवास से द्वितीय आगम ग्रंथ मंदिर तक लाया जाएगा। बता दें
कि समूचा जैन धर्म आगम ग्रंथ में निहित देषणा पर आधारित है। प्रवचन सभा
में राजेन्द्र पालरेचा, दिलीप ओरा, राकेश नाहटा, ललित कोठारी, कनकमल
खाबिया, पारस मारू, अभय मेहता, सुभाष दुग्गड़ सहित विभिन्न समाजजन उपस्थित
थे।

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